:
Breaking News

मोतिहारी से किसान आंदोलन का बिगुल, 10 अगस्त को बिहारभर में जेल भरो आंदोलन की घोषणा

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

मोतिहारी में आयोजित ऑल इंडिया किसान सभा के 38वें बिहार राज्य सम्मेलन में किसानों की समस्याओं को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया गया। 10 अगस्त को पूरे बिहार में जेल भरो आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया। सम्मेलन में नई राज्य परिषद का भी गठन किया गया।

मोतिहारी/आलम की खबर:बिहार की किसान राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में आयोजित ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) के 38वें बिहार राज्य सम्मेलन में किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा करने की रणनीति तैयार की गई। राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने खेती-किसानी की मौजूदा स्थिति, बढ़ती लागत, घटती आमदनी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की। सम्मेलन के समापन के साथ ही संगठन ने 10 अगस्त को पूरे बिहार में जेल भरो आंदोलन चलाने का ऐलान कर दिया।

तीन दिनों तक चले इस सम्मेलन में किसानों के सामने मौजूद समस्याओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। प्रतिनिधियों का कहना था कि खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन किसानों को उनकी फसलों का अपेक्षित मूल्य नहीं मिल रहा। डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक और सिंचाई पर बढ़ते खर्च ने किसानों की आर्थिक स्थिति को कमजोर किया है। ऐसे हालात में खेती करना दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है।

सम्मेलन में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि खेती और किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष बढ़ रहा है। सम्मेलन में यह राय सामने आई कि किसानों की आवाज को मजबूत बनाने के लिए व्यापक जनआंदोलन की जरूरत है।

इसी क्रम में 10 अगस्त को राज्य के सभी जिलों में जेल भरो आंदोलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया। संगठन के नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर होगा और इसके माध्यम से सरकार का ध्यान कृषि क्षेत्र की समस्याओं की ओर आकर्षित किया जाएगा। जिला इकाइयों को निर्देश दिया गया है कि वे अभी से इसकी तैयारी शुरू करें और अधिक से अधिक किसानों को अभियान से जोड़ें।

सम्मेलन में यह भी कहा गया कि किसानों की समस्याएं केवल फसल के दाम तक सीमित नहीं हैं। सिंचाई व्यवस्था, कृषि ऋण, प्राकृतिक आपदाओं से होने वाला नुकसान, खेती के लिए बुनियादी संसाधनों की कमी और बाजार तक पहुंच जैसी समस्याएं भी किसानों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। इन मुद्दों को लेकर आने वाले समय में पंचायत स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

किसान नेताओं ने जोर देकर कहा कि छोटे और सीमांत किसान आज सबसे अधिक दबाव में हैं। उत्पादन लागत बढ़ने और मुनाफा घटने से उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। ऐसे में सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिससे खेती लाभकारी बन सके और किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि हो।

सम्मेलन में संगठन को और मजबूत बनाने पर भी विशेष बल दिया गया। नेताओं ने कहा कि किसान आंदोलन तभी प्रभावी होगा जब संगठन गांव-गांव तक पहुंचेगा। इसके लिए सदस्यता अभियान चलाने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और स्थानीय स्तर पर समितियों को सक्रिय करने का फैसला लिया गया। संगठन का मानना है कि मजबूत जनाधार के बिना किसानों की लड़ाई को प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

कार्यक्रम के दौरान संगठन के नए नेतृत्व का भी चयन किया गया। नई राज्य परिषद के गठन के साथ कई महत्वपूर्ण पदों पर चुनाव संपन्न कराया गया। प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से नए नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि आने वाले समय में संगठन किसानों की समस्याओं को और मजबूती से उठाएगा।

सम्मेलन में विधायक अजय कुमार को राज्य अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं बिनोद कुमार को पुनः महासचिव चुना गया, जबकि मनोज चंद्रवंशी को वित्त सचिव का दायित्व दिया गया। इसके अलावा उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव पदों के लिए भी कई नेताओं का चयन किया गया। नई टीम के गठन के बाद संगठन ने राज्यभर में अपने अभियान को तेज करने का संकल्प दोहराया।

बैठक के दौरान यह निर्णय भी लिया गया कि नई राज्य परिषद की अगली बैठक में कार्यकारी समिति का गठन किया जाएगा। संगठन के नेताओं का कहना है कि आने वाले महीनों में किसान हितों से जुड़े मुद्दों पर लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और संघर्ष को गांवों तक पहुंचाया जाएगा।

सम्मेलन के समापन अवसर पर नेताओं ने किसानों से एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और इनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। किसानों के अधिकार, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा के लिए संगठन आगे भी संघर्ष जारी रखेगा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मोतिहारी सम्मेलन में लिए गए फैसले आने वाले समय में बिहार की राजनीति और किसान आंदोलनों पर असर डाल सकते हैं। खासकर 10 अगस्त को प्रस्तावित जेल भरो आंदोलन की सफलता पर सबकी नजर रहेगी। यदि बड़ी संख्या में किसान इसमें शामिल होते हैं तो राज्य में किसान मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ सकते हैं।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *